ऑरेंज आइसक्रीम
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ऑरेंज आइसक्रीम कुछ आदतें याददाश्त की मोहताज नहीं होतीं कुछ कहानियाँ मुलाक़ात से नहीं, एक छोटी-सी पर्ची से शुरू होती हैं… और कुछ लोग ज़िंदगी से चले जाने के बाद भी हमारी आदतों में ज़िंदा रहते हैं। ‘ऑरेंज आइसक्रीम’ एक भावनात्मक हिंदी कहानी है, जहाँ एक अजनबी मुलाक़ात, कुछ छोटी-छोटी पर्चियाँ और ऑरेंज आइसक्रीम धीरे-धीरे दो लोगों के बीच एक अनकहे रिश्ते की शुरुआत बन जाते हैं। अर्पित और छनक की कहानी में है प्यार की मासूमियत, अनकही बातें, इंतज़ार, यादें और उन एहसासों की गहराई जिन्हें शब्दों में बयाँ करना हमेशा आसान नहीं होता। कभी-कभी किसी इंसान की याद उसकी तस्वीर से नहीं, बल्कि उससे जुड़ी किसी छोटी-सी आदत से लौट आती है। और तब एहसास होता है कि कुछ रिश्ते अधूरे होकर भी हमारे भीतर पूरे जीवन तक रहते हैं। अगर आपको ऐसी कहानियाँ पसंद हैं जो दिल को छू जाएँ, पुरानी यादें ताज़ा कर दें और पढ़ने के बाद भी मन में ठहर जाएँ, तो ‘ऑरेंज आइसक्रीम’ आपके लिए है। लेखक: धनंजय शाक्यवाल क्योंकि कुछ आदतें याददाश्त की मोहताज नहीं होतीं।
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- Hindi
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- 21 October 2026








